गोक्षुरादि गुग्गल के फायदे2022 | gokshuradi guggulu uses and benefits in hindi | gokshuradi guggulu uses in hindi

गोक्षुरादि गुग्गुलु के फायदे | gokshuradi guggulu uses and benefits in hindi | gokshuradi guggulu uses in hindi |patanjali gokshuradi guggulu uses in hindi | gokshuradi guggulu ke fayde | baidyanath gokshuradi guggulu benefits in hindi 

गोक्षुरादि गुग्गुलु क्या है ?

यह आयुर्वेदिक औषधि में प्रयोग होता है |जैसे नाम से मालूम होता है | इस दवा को दो मुख्य रूप से बाटा जाता है गोखरू और गुग्गुल के रूप में , इसके सेवन से रुक -रुक कर पेशाब होना ,पथरी ,प्रदर रोग ,वातरक्त ठीक होते है | 

गोक्षुरादि गुग्गुलु के घटक कौन कौन से है | 

  • गोखरू के पंचांग 
  • शुद्ध गुग्गुलु 
  • सोंठ 
  • मिर्च 
  • पीपल 
  • हर्रे 
  • बहेड़ा 
  • आँवला 
  • नागरमोथा
  • घी 

गोक्षुरादि गुग्गुलु बनाने की विधि | 

सबसे पहले 112 तोले गोखरू के पंचांग को लेकर अच्छी तरह से कूट ले | फिर उसे छः गुने जल में पकावे | आधा जल शेष रहने पर छान ले | फिर इसमें 28 तोला शुद्ध गुग्गुल मिला कर गुड़पाक के समान गाढ़ा कर ,उसमे का कपड़े से छाना हुआ चूर्ण 4 -4तोला मिलाकर  ,घी के साथ कूटकर 3 -3 रत्ती की गोलियाँ बनाकर रख ले | 

 

Note -1 तोला =11. 66 ग्राम

1 रत्ती =121. 50 मिलीग्राम 

गोक्षुरादि गुग्गुलु के गुण और उपयोग | 

इसके सेवन से प्रमेह ,मूत्रकृच्छ (रुक -रुक कर पेशाब होना ),मूत्राघात ,पथरी ,प्रदर रोग ,वातरक्त ,शुक्रदोष और मूत्राशय के समस्त विकारों में लाभ होता है | इस दवा का असर मूत्राशय और मूत्रनली तथा वीर्यवाहिनी शिराओं पर अधिक होता है | 

मूत्रकृच्छ –

यह रोग कई कारणों से होता है ,सूजाक , पथरी ,कृमि, मूत्रग्रंथि का प्रदाह ,जरायु की विकृति ,गुर्दे का विकार ,आंव आदि से यह रोग उत्पन्न होता है | गुर्दे के विकार से जब मूत्रकृच्छ होता है ,तब उल्टी ,दस्त होती है | 

गुर्दे से पीड़ा उठकर जननेंद्रिय तक जाती है | प्रधानतया मूत्रकच्छ में बार -बार पेशाब करने की इच्छा होती है और बड़े कष्ट के साथ -साथ बूंद -बूंद पेशाब या नहीं भी होती है | पेशाब के समय भयानक दर्द होना आदि लक्षण होते है | ऐसी अवस्था में गोक्षुरादि गुग्गुल के उपयोग से बहुत लाभ होता है ,क्योंकि यह मूत्राशय और मूत्रनली के विकारों को दूर करता है ,जिससे पेशाब साफ और खुलकर आने लगता है | 

मूत्राघात –

यह भी बहुत खतरनाक रोग है | इस रोग में पेशाब की थैली में पेशाब भरा रहता है ,किन्तु पेशाब उतरता नहीं है | नाभि के निचे पेडू फूल जाता है | पेशाब करने की इच्छा होती है ,किन्तु पेशाब नहीं होता है | फिर बेचैनी मोह ,बेहोशी आदि लक्षण होते है | रोगी दर्द के मारे चिल्लाता रहता है ,पेडू फूल कर गांठ सी हो जाती है और वह दबाने में कठोर मालूम पढ़ता है और रोगी को विशेष कष्ट होता है | इसमें रबर की सलाई जननेंद्रिय में डालकर पेशाब करना चाहिए | 

साथ ही गोक्षुरादि गुग्गुल का सेवन मिश्री के साथ मिलाकर करना चाहिए | 

शुक्र -प्रमेह या शुक्र की क्षीणता में यह बहुत लाभ करता है | गोदूध के साथ कुछ दिनों तक लगातार सेवन करने से शरीर में शुक्र की वृद्धि हो जाती है | 

और शरीर बलवान और मजबूत हो जाता है | 

गोक्षुरादि गुग्गुल के फायदे | gokshuradi guggulu uses and benefits in hindi 

  • इसके सेवन से पेशाब रूक -रूक होना सही हो जाता है | 
  • यह किडनी ,मूत्रमार्ग के रोगो में बहुत लाभकारी है | 
  • यह शरीर में बढे हुए पित्त को कम करती है | 
  • यह भूख को बढ़ाता है और पाचन क्रिया को सही करता है | 
  • यह प्रदर और शुक्रदोष में बहुत लाभकारी है | 
  • यह मूत्रनली के विकारों को दूर करता है | 
  • उच्च रक्तचाप में यह लाभकारी है | 

गोक्षुरादि गुग्गुल की खुराक विधि | 

1 -1 गोली सुबह शाम गोखरू क्वाथ या प्रमेहर क्वाथ के साथ देना चाहिए |

नोट -बिना डॉक्टर के सलाह के दवा का प्रयोग न करे |  

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गोक्षुरादि गुग्गुल की प्राइस क्या है | 

  • गोक्षुरादि गुग्गुल बैद्यनाथ | 

80 टेबलेट की कीमत 120 रुपये है | 

  • गोक्षुरादि गुग्गुल पतंजलि | 

80 टेबलेट की कीमत 55 रुपये है | 

  • Dhanvantari gokshuradi guggulu 

60 tablet की कीमत 86 रुपये है | 

 

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