कामधेनु रस के फायदे ,उपयोग,घटक क्या -क्या है2022 | kamdhenu ras ke fayde | kamdhenu ras benefits

कामधेनु रस के फायदे ,उपयोग ,घटक क्या -क्या है | kamdhenu ras ke fayde | kamdhenu ras benefits | kamdhenu ras price | kamdhenu ras patanjali | kamdhenu ras ingredients | kamdhenu ras benefits in hindi 

कामधेनु रस क्या है  | what is kamdhenu ras in hindi 

यह रस बल-वीर्यवर्धक ,और पौष्टिक रसायन होता है | इसके सेवन से शरीर में कामोशक्ति बढ़ती है | उत्तेजना आती है | यह वीर्य की कमी दूर कर नपुंसकता को दूर करता है | पाचन क्रिया को सुधारने में भी इसका प्रयोग बहुत अधिक होता है | 

अगर अधिक मात्रा में प्यास लग रहा है | सारे शरीर में जलन हो रहा है तथा ज्यादा शरीर में पसीना हो रहा है | उसके लिए कामधेनु रस का प्रयोग बहुत सराहनीय है | 

कामधेनु रस के घटक कौन -कौन से है | kamdhenu ras ingredients 

  • शुद्ध गंधक 
  • आँवला -कली 
  • सेमल मूसली 

कामधेनु रस बनाने का तरीका | 

सबसे पहले शुद्ध गंधक और आँवला -कली चूर्ण इन दोनों को समान मात्रा में लेकर आँवला -रस और सेमल मूसली के रस 7 -7 भावना देकर छाया में सुखाकर रख ले | और प्रयोग करे | 

कामधेनु रस के गुण और उपयोग 

यह बल -वीर्यवर्धक ,कामोद्दीपक तथा पौष्टिक रसायन है ,इसके सेवन से प्रमेह ,शुक्रमेह ,ध्वजभंग ,आदि नष्ट होकर शरीर में कामशक्ति अधिक मात्रा में होती है | वीर्य की कमी से उत्पन्न नपुंसकता ,इन्द्रियों की शिथिलता ,सुस्ती आदि इससे बहुत जल्दी ठीक हो जाती है | यह रस -रक्तादि धातुओं को शुद्ध करके रक्त बढ़ाता तथा नया यौवन प्रदान करता है | 

पाचन क्रिया में जब भी विकृति उत्पन्न हो जाती है ,अर्थाथ पाचक -पित्त की निर्बलता के कारण भोजन किये हुए पदार्थ का ठीक -ठीक पाचन नहीं होने से रस -रक्तादि धातु अच्छी तरह से नहीं बन पाती है ,जिससे रक्तादि धातुओं का क्रमशः क्षय होकर शरीर कमजोर होने लगता है | फिर अनेक उपद्रव खड़े हो जाते है | इसके लिए कामधेनु रस प्रयोग करना चाहिए | 

जीर्णज्वर में उपयोगी –आयुर्वेद में लिखा है की ‘त्रिसप्ताह व्यतीते तू जीर्णज्वर प्रचुयते बुधैः अर्थात 21 दिनों के बाद ज्वर ,जीर्णता में परिणित हो जाता है | 

इसमें मंदागिनी होने से पाचन क्रिया ठीक -ठीक नहीं होती है | अतएव शरीर में रक्तकणों की कमी हो जाने से रक्त का क्षय हो जाता है | रक्तकणों की कमी के कारण शरीर कांतिहीन हो जाता है तथा ज्वर ,व्यास जलन ,चक्कर आना ,मन में बेचैनी ,नाड़ी की गति में वृद्धि इत्यादि लक्षण होते है | ऐसी अवस्था में कामधेनु रस का प्रयोग अवश्य करना चाहिए | 

विषम ज्वर की तीव्र अवस्था में कामधेनु रस का प्रयोग नहीं करना चाहिए | किन्तु जब विषम ज्वर पुराना हो जाता है ,तब ज्वर का विष रक्तादि धातुओं को दूषित करता है | ऐसी अवस्था में कामधेनु रस का प्रयोग करने से रस -रक्तादि धातुओं का शोधन होकर अच्छा फायदा होता है | 

पैत्तिक प्रमेह में उपयोगी –बराबर ज्यादे मात्रा में पीतवर्ण का पेशाब होना ,प्यास ज्यादा लगना ,संपूर्ण शरीर में जलन ,पसीना ज्यादा निकलना आदि लक्षण होने पर कामधेनु रस ,प्रवाल चन्द्रपुट्टी तथा गिलोय सत्व के साथ प्रयोग करना चाहिए | 

अम्लपित्त रोग में आमाशय की विकृति के कारण अन्न का पाचन ठीक से न होकर आमाशय में ही अन्न अधिक काल तक पड़ा रहना ,जिससे पेट में भारीपन ,जी मिचलाना ,मुँह का स्वाद नष्ट हो जाना ,खाया हुआ अन्न कुछ समय में जलयुक्त दुर्गन्धमय होकर वमन के द्वारा बाहर निकल जाना ,खट्टी डकारे आना -प्रभूति लक्षण होते है तथा अम्लपित्त की अवस्था में पानी तक नहीं पचता है | पानी पिने के बाद तुरंत वमन हो जाती है | 

ऐसी अवस्था में कामधेनु रस देने से आमाशय में रहने वाला पित्त जागृत होकर पाचन क्रिया को सुधार देता है ,जिससे अन्न पचने में बाधा नहीं होती है तथा इसके सामक प्रभाव के कारण पित्त की अम्लता के कारण होने वाले वमन ,खट्टी डकार ,जी मिचलाना आदि ख़त्म हो जाते है | 

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कामधेनु रस के फायदे | kamdhenu ras ke fayde | kamdhenu ras benefits in hindi 

  • अगर शरीर में धातुओं की कमी है | वीर्य गाढ़ा नहीं है | शरीर में हमेशा सुस्ती बनी रहती है | ऐसे में कामधेनु रस बहुत उपयोगी है | 
  • अगर शरीर की इन्द्रियाँ शिथिल हो गई है | नपुंसकता के लक्षण दिखाई दे रहे ,ऐसे में यह रस बहुत लाभ पहुँचाता है | 
  • पेट साफ नहीं रहता है | भोजन खाने के बाद पचता नहीं है ,तो इसका सेवन जरूर करे | 
  • शरीर में अम्ल अधिक मात्रा में बढ़ गया है तो यह छुटकारा दिलाता है | 
  • अगर अधिक मात्रा में पेशाब हो रहा है ,प्यास ज्यादा लग रहा है ,सम्पूर्ण शरीर में जलन हो रहा है ,पसीना ज्यादा निकल रहा है तो कामधेनु रस का प्रयोग अवश्य करना चाहिए | 
  • महिलाओं में मासिक धर्म ठीक से नहीं हो रहा है तो इसका प्रयोग अवश्य करना चाहिए | 
  • यह डायबिटीज की समस्या में बहुत लाभ पहुँचता है | 
  • यह जीर्ण ज्वर में बहुत लाभकारी है | 

कामधेनु रस की खुराक | 

250 से 500 मिलीग्राम दूध ,शहद या घी और मधु में मिलाकर देना चाहिए | 

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कामधेनु रस के साइड इफ़ेक्ट क्या है | kamdhenu ras side effect in hindi 

इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं देखा गया है | लेकिन डॉक्टर की राय में ही दवा प्रयोग करे |

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